भोर-भिनसार उत्तर भारत की लोकभाषाओं में प्रचलित एक सुंदर शब्द है, जो सुबह के पहले पहर और सूर्योदय से ठीक पहले के समय को दर्शाता है। यह शब्द ग्रामीण जीवन, कृषि संस्कृति और लोक परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
भारतीय भाषाओं की सबसे बड़ी खूबसूरती यह है कि यहाँ हर समय, हर भाव और हर क्रिया के लिए अलग-अलग शब्द मिल जाते हैं। ऐसा ही एक शब्द है “भोर-भिनसार”, जो उत्तर भारत की लोकभाषाओं में बड़े प्रेम से बोला जाता है। भोर-भिनसार का अर्थ है सुबह का पहला पहर, यानी वह समय जब अंधकार धीरे-धीरे विदा ले रहा होता है और सूरज के आने की आहट धरती पर महसूस होने लगती है।
भोर-भिनसार: नए दिन की शांत शुरुआत
भोर-भिनसार केवल सुबह का समय नहीं है, बल्कि यह जीवन की सहज लय को दर्शाता है। पहले अंधेरा छाया रहता है, फिर उजाले की हल्की रेखा दिखती है। इसलिए किसान जागते हैं, और अंततः दिन नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ता है।

यह शब्द विशेष रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश की बोलियों में प्रचलित है। भोजपुरी और मगही में इसे भिनसार या भिनसर कहा जाता है। आम बोलचाल में लोग कहते हैं –
“भिनसरे उठ के खेत पर चल जाईब”
अर्थात सुबह जल्दी उठकर खेत पर जाना।
भोर-भिनसार केवल समय का संकेत नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण जीवन की लय को दर्शाता है। पहले जहाँ अंधकार होता है, वहीं धीरे-धीरे उजाला फैलता है। इसीलिए किसान और पक्षी जागते हैं, और अंततः दिन नई उम्मीदों के साथ शुरू होता है।
अवधी भाषा में इसी अर्थ के लिए उजास शब्द का प्रयोग होता है, जबकि मैथिली में भी भिनसार शब्द खूब बोला जाता है। छत्तीसगढ़ी में बिहान और भिनसर दोनों शब्द मिलते हैं। मानक हिंदी में इस समय को भोर, प्रातः या तड़के कहा जाता है। राजस्थानी और हरियाणवी में तड़के अधिक प्रचलित है, वहीं बंगाली में इसे भोरबेला कहा जाता है।
भोर-भिनसार शब्द की उत्पत्ति संस्कृत की “भास्” धातु से मानी जाती है, जिसका अर्थ है प्रकाश, चमक या उजाला। यह शब्द केवल समय का संकेत नहीं देता, बल्कि ग्रामीण जीवन की दिनचर्या, किसानों की मेहनत, पक्षियों की चहचहाहट और नए दिन की उम्मीदों को भी अपने भीतर समेटे हुए है।
आज भी गाँवों में भोर-भिनसार का समय सबसे पवित्र और सक्रिय माना जाता है। यही कारण है कि आधुनिक जीवन के बावजूद यह शब्द आज भी जीवित है और लोकभाषाओं की मिठास को बनाए हुए है।
प्रश्न 1: भोर-भिनसार का क्या अर्थ है?
उत्तर: भोर-भिनसार का अर्थ है सुबह का पहला पहर, सूर्योदय से ठीक पहले का समय।
प्रश्न 2: भोर-भिनसार शब्द किन भाषाओं में प्रचलित है?
उत्तर: यह शब्द भोजपुरी, मगही, मैथिली, अवधी और छत्तीसगढ़ी जैसी लोकभाषाओं में प्रचलित है।
प्रश्न 3: मानक हिंदी में भोर-भिनसार के लिए कौन-सा शब्द प्रयोग होता है?
उत्तर: मानक हिंदी में भोर, प्रातः और तड़के शब्द प्रयोग किए जाते हैं।
प्रश्न 4: भोर-भिनसार शब्द का सांस्कृतिक महत्व क्या है?
उत्तर: यह शब्द ग्रामीण जीवन, कृषि कार्य, दिनचर्या और नए दिन की शुरुआत का प्रतीक है।