ये तो चिंदी है

ये तो चिंदी है

“चिंदी”: छोटा शब्द, गहरे अर्थ! आपकी रोज़मर्रा की भाषा का अनमोल हिस्सा


‘चिंदी’ (Chindi) शब्द हमारी रोज़मर्रा की बातचीत में इतनी आसानी से घुलमिल गया है कि अक्सर हम इसके वास्तविक और गहरे अर्थ पर ध्यान नहीं देते। यह छोटा-सा शब्द भारतीय भाषाओं, खासकर हिंदी और उसकी बोलियों में, अलग-अलग संदर्भों में इस्तेमाल होता है और एक खास सांस्कृतिक महत्व रखता है।

चिंदी के विभिन्न रूप और अर्थ



कपड़े के टुकड़े: मूल रूप से, ‘चिंदी’ का अर्थ कपड़े की कतरन या फटे-पुराने कपड़े से होता है। गुजरात और महाराष्ट्र में साड़ी या दुपट्टे के बॉर्डर को भी ‘चिंदी’ कहा जाता है।


पैसा और कंजूसी: बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में, अठन्नी, चवन्नी या पाँच-दस पैसे को भी ‘चिंदी’ के रूप में जाना जाता था, जो छोटी रकम का प्रतीक है।


मुहावरे में:
मुहावरा “चिंदी चोर” किसी कंजूस या छोटी-मोटी चीज़ों पर भी लालच करने वाले व्यक्ति के चरित्र को तुरंत बयां करता है। यह शब्द तुच्छ या मामूली चीज़ों के संदर्भ में भी प्रयोग होता है।


संस्कृत से संबंध: इस शब्द की जड़ें संस्कृत के ‘छिन्न’ शब्द में हैं, जिसका अर्थ है ‘विभाजित या खंडित’। इसी से ‘भिन्न’ शब्द भी बना है।झारखंड के रामगढ़ जिले में ‘रजरप्पा’ के पास छिन्नमस्तिका देवी का प्रसिद्ध मंदिर इसका एक और उदाहरण है, जो भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है।

छिन्मस्ता मंदिर जानिए विस्तार से: https://www.sanatan.org/en/a/91249.html

अंग्रेजी में चिंदी के पर्याय



अंग्रेजी में, ‘चिंदी’ के लिए ‘rag’, ‘shred’, ‘scrap’ (कपड़े के संदर्भ में) और ‘tatter’ जैसे शब्दों का प्रयोग होता है। वहीं, पैसे के संदर्भ में, ‘pittance’ (बहुत कम रकम) इसका करीबी अर्थ दर्शाता है।


संक्षेप में, ‘चिंदी’ महज़ एक शब्द नहीं है, बल्कि यह सांस्कृतिक, आर्थिक और भाषाई इतिहास को अपने आप में समेटे हुए है।


क्या आप अपने क्षेत्र में ‘चिंदी’ का कोई खास इस्तेमाल जानते हैं? कमेंट में बताएं!

चिंदी चोर की कहानी देखिये:

Article on AI-Powered Efficiency: The Future of Energy Savings for Homes https://jyotblissclass.com/wp-admin/post.php?post=1227&action=edit

7 Comments

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *